Upsarg aur Pratyay (उपसर्ग और प्रत्यय)
Overview
उपसर्ग और प्रत्यय हिंदी व्याकरण के शब्द-रचना (word formation) भाग का अनिवार्य अंश है। HP TET में यह विषय Language I — Hindi के अंतर्गत आता है और प्रायः 2–4 प्रश्न सीधे इसी से पूछे जाते हैं। परीक्षा में शब्द को तोड़कर मूल शब्द, उपसर्ग या प्रत्यय पहचानना, नए शब्द बनाना और अर्थ-परिवर्तन समझना — इन तीनों कौशलों की परख होती है।
इस विषय की समझ से Shabd Bhed, Sandhi-Samas और Paribhashik Shabdavali जैसे अन्य प्रकरण भी आसान हो जाते हैं। मूल शब्द में उपसर्ग या प्रत्यय जोड़ने पर अर्थ बदल जाता है — यही केंद्रीय अवधारणा है जिसे परीक्षार्थी को आत्मसात करना चाहिए।
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Key Concepts
- **उपसर्ग (Prefix):** वे शब्दांश जो मूल शब्द के **आगे** जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं।
*उदाहरण:* अ + न्याय = अन्याय (न्याय का अभाव)
- **प्रत्यय (Suffix):** वे शब्दांश जो मूल शब्द के **पीछे** जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
*उदाहरण:* मीठा + आस = मिठास (गुणवाचक संज्ञा)
- **उपसर्ग स्वतंत्र अर्थ नहीं रखते** — अकेले प्रयोग में नहीं आते; प्रत्यय भी अधिकतर ऐसे ही होते हैं।
- **उपसर्ग के तीन स्रोत:**
1. संस्कृत उपसर्ग (तत्सम) 2. हिंदी उपसर्ग (तद्भव/देशज) 3. उर्दू/अरबी-फ़ारसी उपसर्ग (विदेशी)
- **प्रत्यय के दो मुख्य भेद:**
1. कृत् प्रत्यय — क्रिया (धातु) में जुड़कर संज्ञा/विशेषण बनाते हैं। 2. तद्धित प्रत्यय — संज्ञा/विशेषण/सर्वनाम में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं।
- **एक ही उपसर्ग अलग-अलग अर्थ दे सकता है:** 'प्र' = आगे (प्रगति), अधिक (प्रबल)।
- **प्रत्यय जोड़ने पर मूल शब्द की ध्वनि बदल सकती है:** सुंदर + ता = सुंदरता; मीठा + आस = मिठास।
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Formulas / Key Facts
### प्रमुख संस्कृत उपसर्ग (20)
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण | |--------|------|--------| | अ / अन् | अभाव, निषेध | अधर्म, अनपढ़ | | अति | अधिक | अत्याचार, अतिशय | | अधि | ऊपर, श्रेष्ठ | अधिकार, अध्यक्ष | | अनु | पीछे, समान | अनुसार, अनुभव | | अप | बुरा, दूर | अपमान, अपव्यय | | अभि | सामने, अधिक | अभिनय, अभिमान | | आ | तक, ओर | आजन्म, आकर्षण | | उप | निकट, सहायक | उपदेश, उपवन | | दुर्/दुस् | बुरा, कठिन | दुर्गम, दुष्कर्म | | नि | नीचे, भीतर | निवास, निबंध | | निर्/निस् | बिना, बाहर | निर्दोष, निश्चय | | परा | उल्टा, पीछे | पराजय, पराभव | | परि | चारों ओर | परिवार, परिणाम | | प्र | आगे, अधिक | प्रगति, प्रबल | | प्रति | विरुद्ध, हर | प्रतिदिन, प्रतिकूल | | वि | विशेष, बिना | विजय, विदेश | | सम् | साथ, पूर्ण | संगम, संतोष | | सु | अच्छा | सुपुत्र, सुगम | | कु | बुरा | कुपुत्र, कुमार्ग | | अव | नीचे, बुरा | अवगुण, अवनति |
### प्रमुख हिंदी उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण | |--------|------|--------| | अन/अ | निषेध | अनजान, अनहोनी | | औ | बुरा, हीन | औगुण, औसर | | उन | एक कम | उनतीस, उनसठ | | भर | पूरा | भरपूर, भरपेट | | सु | अच्छा | सुडौल | | दु | दो/बुरा | दुबला, दुगुना | | चौ | चार | चौराहा, चौपाया |
### प्रमुख उर्दू/फ़ारसी उपसर्ग
| उपसर्ग | अर्थ | उदाहरण | |--------|------|--------| | ना | नहीं | नालायक, नापसंद | | बद | बुरा | बदनाम, बदमाश | | बे | बिना | बेईमान, बेकार | | ला | बिना | लापरवाह, लाचार | | हम | साथ | हमदर्द, हमउम्र | | ख़ुश | अच्छा | ख़ुशबू, ख़ुशमिज़ाज | | सर | मुख्य | सरदार, सरपंच |
### प्रमुख कृत् प्रत्यय (धातु + प्रत्यय)
| प्रत्यय | उदाहरण | |---------|--------| | अक | लेखक (लिख्+अक), गायक | | अन | पठन, लेखन | | आ | पूजा, सेवा | | आई | लड़ाई, कटाई | | आव | बहाव, दिखावा | | आवट | सजावट, रुकावट | | आहट | घबराहट, चिल्लाहट | | इया | डाकिया, रसोइया | | औता/औती | समझौता, मनौती |
### प्रमुख तद्धित प्रत्यय (संज्ञा/विशेषण + प्रत्यय)
| प्रत्यय | कार्य | उदाहरण | |---------|------|--------| | ता | भाववाचक संज्ञा | मूर्खता, सुंदरता | | त्व | भाववाचक संज्ञा | मनुष्यत्व, गुरुत्व | | पन | भाववाचक संज्ञा | बचपन, लड़कपन | | आस | भाववाचक संज्ञा | मिठास, खटास | | ई | विशेषण/स्त्रीलिंग | लोहारी, देशी | | ईय | विशेषण | भारतीय, राष्ट्रीय | | इक | विशेषण | ऐतिहासिक, सामाजिक | | वान/वाला | युक्त | धनवान, दुकानवाला | | हीन/रहित | बिना | धनहीन, जलरहित |
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Worked Examples
**प्रश्न 1:** 'अनुशासन' में उपसर्ग और मूल शब्द बताइए।
**हल:**
- उपसर्ग = अनु (पीछे/अनुकूल)
- मूल शब्द = शासन
- अर्थ = नियम के अनुसार व्यवहार
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**प्रश्न 2:** 'मिठास' में कौन-सा प्रत्यय है और मूल शब्द क्या है?
**हल:**
- मूल शब्द = मीठा
- प्रत्यय = आस (भाववाचक संज्ञा बनाने वाला)
- मीठा → मिठास (ध्वनि परिवर्तन पर ध्यान दें)
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**प्रश्न 3:** 'बेईमान' शब्द में उपसर्ग पहचानिए।
**हल:**
- उपसर्ग = बे (उर्दू — बिना)
- मूल शब्द = ईमान
- अर्थ = जिसमें ईमान न हो
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Common Mistakes
| ❌ गलत समझ | ✅ सही समझ | |-----------|-----------| | 'प्रतिदिन' में 'दिन' उपसर्ग है। | 'प्रति' उपसर्ग है; 'दिन' मूल शब्द। उपसर्ग सदा **आगे** जुड़ता है। | | 'आस' और 'इक' को एक जैसा मानना। | 'आस' भाववाचक संज्ञा बनाता है (मिठास); 'इक' विशेषण बनाता है (ऐतिहासिक)। | | 'अनजान' में संस्कृत 'अ' उपसर्ग समझना। | यहाँ हिंदी/तद्भव 'अन' उपसर्ग है; 'जान' हिंदी शब्द है। | | प्रत्यय जोड़ते समय मूल शब्द की वर्तनी वैसी ही रखना। | मूल शब्द में ध्वनि-परिवर्तन हो सकता है: मीठा → मिठास, सुंदर → सौंदर्य। | | कृत् और तद्धित प्रत्यय में अंतर न करना। | कृत् = धातु (क्रिया) में; तद्धित = संज्ञा/विशेषण में। |
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Quick Reference
1. **उपसर्ग आगे, प्रत्यय पीछे** — शब्द की शुरुआत देखो → उपसर्ग; अंत देखो → प्रत्यय। 2. **संस्कृत उपसर्ग = 20** (अ, अनु, अप, अभि, आ, उप, दुर्, नि, निर्, परा, परि, प्र, प्रति, वि, सम्, सु, कु, अव, अति, अधि)। 3. **'बे', 'ना', 'बद', 'ला' = उर्दू उपसर्ग** — निषेध/अभाव का अर्थ। 4. **'ता', 'त्व', 'पन', 'आस' = भाववाचक संज्ञा बनाने वाले प्रत्यय।** 5. **'इक', 'ईय' = विशेषण बनाने वाले प्रत्यय।** 6. परीक्षा ट्रिक: शब्द को दो भागों में तोड़ो → पहला हिस्सा अर्थ-हीन लगे तो वह उपसर्ग है।